खेद जताना चाहता हु,
उस जवान से जिसका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हो.
उस किसान से जो बर्बाद हुई फसल पर रोता बिलखता हो.
उस पीड़ित महिला से जिसका जख्म उसे रोज कचोटता हो.
उस मजदूर से जो रोज अपनी खुशियों का गला घोंटता हो.
पर दिल पर हाथ रख कहो क्या सिर्फ इतना ही काफी है,
क्यूंकि मेरे देश में राजनैतिक गुनाहों की सजा अंत में माफ़ी है.
#खेद