अजीब सी उलजन मेरे मन को खाई जा रही है,
दिल में बेचेनियो की बारिश छाई जा रही है।
कुछ तो हो रहा है मिल कर भी जी नहीं आ रहा,
डरे डरे से रह कर जान में खुशियों की खूबी आ रही है।
ये कैसा माहौल है जहा हर कदम सोचने में जा रहा है,
ये इतिफाक की डगर मिलने के बाद भी डराए जा रही है।
एक जगह ना मिली थोड़ी सी दिल की बाते करने के लिए,
हर बार घूमते घूमते एक ही जगह अजीब मंज़र मिले जा रही है।
उस बाहों में ले लिया फिर अजीब एक जिंदगी की रुसवाई आ रही है,
उससे मिल कर भी दुनिया की दूरियां मुजसे वास्ता निभा रही है।
क्या कहूं उसकी राह तकते तकते मेरी आँखे नम हुए जा रही है,
आने वाली जिंदगी पल पल बदलते मंज़र दिखाए जा रही है
DEAR ZINDAGI 💞