ऐ-हुस्न-की-राजकुमारी क्या खूब लिखा है
समय बहाकर ले जाता है
नाम और निशान
कोई "हम" में रह जाता है
कोई "अहम" में रह जाता है
बोल मीठे ना हो तो "हिचकीया" भी
हुस्न-की-परी नहीं आती
घर बड़ा हो या छोटा
अगर "मिठास" ना हो तो "इंसान" तो
क्या "चीटियां" भी नहीं आती
ऐ-हुस्न-की-राजकुमारी🌹