!! जय श्री महाँकाल !!
*गणनाथमनाथबन्धुं* *सिन्दूरपूरपरिशोभितगण्डयुग्मम्।* *उदण्डविघ्नपरिखण्डनचण्डदण्डम्* *आखण्डलादिसुरनायकवृन्दवन्द्यम्🔥*
*🔥भावार्थ: अनाथों के बंधु, सिंदूर से शोभायमान दोनों गण्डस्थलवाले, प्रबल विघ्न का नाश करने में समर्थ एवं इन्द्रादि देवों से नमस्कृत श्री गणेश का मैं प्रातः काल स्मरण करता हू*
*अनंत चतुर्दशी*
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