हमला करके चले गए वो
जाने कितनों का घर तबाह कर गए वो
मज़हब के नाम पे बटवारें किये वो
मजहब को बीच बाजार रुषवा किये वो
कितने घरों के चिराग उजाड़ गए वो
और अपने मजहब पे इतराने लगे वो
ए खुदा काश तूँ आता जमीन पे
और समाजाता इनको ये
जब खुदा एक है तो मजहब कैसे जुदा है
#हमला