बेख़बर में भी हूं बेखबर तूं भी हैं
कौन जाने हमारी कोन सी मंज़िल है
अनजाने रास्ते पे निकल पड़े है
कौन जाने कौन से मोड़ पे मिलेंगे ये रास्ते
ए खुदा एक तुझपे ही भरोसा है
आज नही तो कल मिलेंगी मंजिल हमें
जो चाहा है हमने वो पाएंगे
बिछड़े दिल फिरसे मिल जाएंगे
#बेखबर