उसे फुर्सत नहीं था मेरी बात सुननेको फिर भि में बोलती रही, जब बात खतम हुई मुडके देखा तो पास में कोई नहीं । रोइ थी बहत उसदीन फुर्सत में, बक्त उनके कम थे जीबन में । मालुम नाथी मुझे इस बारेमें, में तो बेबजा सक कर रही थी उनकी प्यार में । खुस देखना चाहते थे मुझे उस खातीर् गम को दिलमें छुपा लिये, पता ना चले बात की खबर इसलिए बुरे बनगये । में भी पागल समझी नहीं सक करती रही, आज भी उन यादोंसे मुझे फुर्सत नहीं ।
#फुर्सत