प्रभात
बीती रात हुई प्रभात लाई नव सौगात।
किसलय, कलि, कुसुम खिले कोमलगात।
खग कुल कर रहे ख़ुशी से खिलखिलाट।
रवि की किरणे कर रही जगमग जगमगाट।
मंद मंद मलयानिल कर रहा सर सराहट।
नव आनंद, नव उत्साहभर करता थनगनाट।
आलस मरोड़ छोड़ उठ, कर नई शुरुआत।
नैराश्य, हीनता, दीनता त्याग, भर ताजगी तरवराट।
नव कर्म कर, नव मार्ग धर, कदम भर विराट।
बाधाओं कर पछाड़, विजय पताका करे लहराट।
- दीपेश कामडी 'अनीस'