केहना चाहता हूं लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है , पहेचान ते है सब मुझे लेकिन जानता कोई नहीं, सब के साथ रहता हूं लेकिन खुदसे कभी नहीं मिल पाता. जिंदगी में किसीको क्या अच्छा लगता है ,उसको क्या चाहिए ,क्या पसंद है उसको वो सब किया पर कभी किसी ने ये नहीं पूछा की भाई तुझे क्या चाहिए ,तुझे किस से खुशी मिलती है और नाही कभी मेंने खुदसे पूछा की मुझे क्या चाहिए, कोई नहीं है जिससे में अपने दिल की बात बता सकू और कोई एसा दोस्त भी नहीं है जिसके साथ आंसू बहा कर दुख बाट सकू. ए सब में किसीको नीचा दिखाने या अपने आप को महान बताने के लिए नहीं लिख रहा पर आज पता चला कि मेरे नसीब में नाही में खुद हूं नाही कोई और .रोना तो बहुत चाहता हूं पर आंसू भी मेरे नहीं है जो अकेलेपन में आंखों से बाहर आए 😊 कल जो केहते थे मुझे की तुज पे सिर्फ मेरा हक है,और आज उसपे मेरा कोई हक नहीं, अच्छा हुआ कि वो दूर होकर किसिके साथ अपना दुख तो बाट रहे होंगे क्युकी मेरे पास उसके लिए खुशी की कोई बात ही नहीं थी और जो था वो था एक घुटन भरा प्यार और उम्मीद भी क्या रखते मुज जैसे लाचार,साईको,पतले,काले और लाल रहने वाली आंखो वाले से. में किसी के काबिल नहीं हूं क्युकी में खुद को खुश नहीं रखसकता तो दूसरों को क्या रखूंगा 😊 कोरोना में मेरी नौकरी तो जाएगी अब मुझे भी लेजा अब इस निकम्मे का क्या काम यहां पे. क्युकी कमसे कम किसीको तकलीफ़ तो नहीं दूंगा में, पता नहीं में क्यों ए सब लिख रहा हूं बस मेने सब कुछ जी लिया है जिंदगी में बस एक आखरी इच्छा है सुकून से मर सकू बस , में अब किसिका नहीं होसकता , नाही मेरे कोई सपने है और नाही कोई इच्छा , में किसीको दुखी नहीं करना चाहता पर मुझसे सब दुखी हो जाते है , में तो एक पूरी किताब लिखना चाहता था पर नहीं लिखसक्ता क्युकी मेरी वजह से किसीको बहोत चोट पहोची है और नहीं पहोचाना चाहता 🙏
धन्यवाद
मेरी अधूरी दास्तान......