ज़रा अपनी बात पर गौर फरमाइए,
फिर जो सच है उसे बताइए,
ये कसमें ये वादे सब नेक है,
मगर दिल की बात जुबां पर लाइए।
मगर मुझे वो पल भी याद दिलाई ये
जिस पल मै ने याद ना किया हो,
बस मेरे उन पलो को एसे
क्रोध में ना आजमाइए l
मुझे मोहब्बत से तुझ से ऐतराज़ कब है,
अगर प्यार है तो किसी बीच में ना लाइए
हर खुशी अब मायूस होती है,
जो तेरे ख्यालों के साथ बदलती है।
मेरी नफरतों की पहुंच तुझ तक नहीं,
उस से इस कदर ना घबराइए।
प्यार मोहब्बत ईस्क सब है,
मोह में मगर मुझे ना बांधिए।