हां थोड़ा मुश्किल था दहलीज को पार करना
उन जंजीरों को तोड़ के घर से निकलना जिन्होंने जकड़ के रखा था मुझे बंदिशों में
पर ख़ुद पे विश्वास और थोड़ी सी हिम्मत कर निकल पड़ी मै अपनी खुद की मंजिल पर ,
अपने खुद के रास्ते खोजने
जरूरी भी था ये सबको बताना कि जब भी किसी औरत पे हाथ उठेगा तब तब वो रचेगी एक नया इतिहास जो रचना करेगा एक नए समाज की
एक ऐसे समाज की जो नहीं करता औरत पे कटाक्ष जब वो चलती है अकेले अपनी मंजिल को पाने.... अपने रास्ते ख़ुद चुनने .....अपने मंजिलों को पाने.... एक आत्मविश्वास से भरपूर जो बनाती है एक सेतु संघर्ष के बाद की ऊंचे आसमान को छूने का.... रितु की कलम से✍️
#मुश्किल