हर वज़ह तुम्हारी बहोत अच्छी लगती थी
खुशी की लहर आ जाती थी,
जब जब तुम लहेराते बालो को सहलाती थी,
और तिरछी नज़र से मुझ को देखती थी,
एहसास तो सीने में तब होता जब सीने से लिपट जाया करती थी,
बिजली की आवाज़ से कैसे डर जाया करती थी,
आज वोह दिन बस यादों में कैद एसे हो गये हैं जैसे क़ोई बेगुनाह को सज़ा मीला करती है,
आज वोह ख़ुशी युह गम में बदल गई है जैसे कोई लुटी हुई जिंदगी है,
हर वज़ह तुम्हारी बहोत अच्छी लगती थी लेकिन आज बहोत तडपाती है...
#खुशी