अपने से ख़ुश जी रहे थे,
आँखों पे थी ख़ुशी,
और होठों में मुस्कान,
पर जाने ये क्या बवाल हो गया।
उनका एक कॉल क्या आया,
ख़ुशी हो गयी काफ़ूर,
होंठ गये सूख,
और जीना मानो एक सवाल हो गया।
उनके ख़याल में,
अब बस आँसू पिया करते हैं,
लाख बहलालें भले ही दिल को,
हम तो बस ख़ाक जिया करते हैं।