Hindi Quote in Story by Rajesh Maheshwari

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संयम


एक कारखाने में प्रबंधकों एवं मजदूरों के बीच विवाद चल रहा था, इसे खत्म करने के लिये प्रबंधकों ने अपने दूसरे कारखाने के एक उच्च पदाधिकारी को नियुक्त किया जिससे श्रमिक और ज्यादा भडक उठे और उसे भगाने के उपाय सोचने लगे। एक दिन उन्होने उस पदाधिकारी का अर्थी जूलुस निकालने का कार्यक्रम बनाया ताकि वह विचलित होकर भाग जाये। यह खबर जब प्रबंधकों तक पहुंची तो उन्होने उसको पुलिस का सहयोग लेकर इसे रोकने का सुझाव दिया।
वह पदाधिकारी बहुत अनुभवी व्यक्ति था वह किसी भी रूप में पुलिस का हस्तक्षेप नही चाहता था। उसका स्पष्ट मत था कि यह मजदूर भी हमारे परिवार के एक अंग के समान है, इन्हें प्रताडित करना हमारे लिये हानिकारक हो सकता है। हमारा उद्देश्य अशांति को समाप्त करना है ना कि उसे और बढ़ाना। दूसरे दिन अर्थी जुलूस के नियत समय पर पहुँचकर वह स्वंय अपनी ही अर्थी को कंधा देने के लिये तैयार हो जाता है यह देखकर सारे लोग यह सोचने लगते हैं कि यह कैसा जुलूस है जिसमें जीवित व्यक्ति स्वयं अपनी अर्थी को कंधा दे रहा हो। इसलिये सारे मजदूर अर्थी जुलूस का कार्यक्रम स्थगित कर देते है।
इसके उपरांत उसी समय वह पदाधिकारी बिना किसी औपचारिकता के श्रमिको से उनकी माँगों के संबंध में बातचीत आरंभ कर देता है। वह उनसे विनम्रतापूर्वक आग्रह करता है कि हमारा प्रयास होना चाहिये कि “ हम करेंगे अधिक काम और पायेंगे अधिक वेतन, सुविधा और सम्मान ।“ उसके अथक प्रयासों से दोनो पक्षों के बीच सम्मानजनक समझौता होकर हड़ताल समाप्त हो जाती है। जीवन में संयम, धैर्य और बुद्धिमत्ता से कठिन परिस्थितियों में भी सफलता प्राप्त की जा सकती है।

Hindi Story by Rajesh Maheshwari : 111500798
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