खुशी जो आरजी शै है न मैं कभी लूंगी
जो हो सका तो बस एक सोजे—दायमी लूंगी
जिगर में दर्द, रगों में टीस, आंखों में अश्क
तेरी खुशी है तो मैं इस तरह भी जी लूंगी
निहा है खूने—जिगर में ही गर हयसे—दवाम
तो मुस्कुरा के मैं खूने—जिगर भी पी लूंगी
रमूजे—दिल को छिपाने के वास्ते ऐं दोस्त!
तेरी कसम है कि मैं अपने होंठ सी लूंगी
दलीले—राहे—मुहब्बत खिरद तो बन न सकी
जुनूने—शौक से अब दसें—रहबरी लूंगी