माँ मेरी
माँ मेरी कितनी भोली है
मेरे माथे की रोली है
चन्दन उसके दामन का
स्वेत रंग से सोभित है।
माँ मेरी.............
जब वो मेरे लिए जी उठती है
ममता से भर उठती है
सोता रहता हु मै आपनी दुनिया मे
वो मेरे लिए जाग उठती है।
अपनी माँ की तारीफ करू
वो फूलो से महकती
स्वाधी-स्वाधी उसकी खुसबू
मेरे दामन मे भी होती ।
माँ मेरी..............
मेरे लिए मिठाई को
वो सबसे छुपा कर रखती है
मेरे नहाने पर वो पीछे से आ जाती
कपड़ो को मेरे धूल कर ,
हरदम वो सुखाती।
मां मेरी..........
मेरे सपनो के लिए जब
काली रातो मे जग जाती
वो प्यारी मेरी माँ ही
जो समझ मुझे पाती है।
माँ मेरी..............