"स्त्री ओर प्रकृति दोनो ही सृजन करती है ओर जो सृजन करता है वो कभी किसीके अधीन नही होता।"
कभी भी किसी पुरुष को ये नही सोचना चाहिए की कोई भी स्त्री उसके अधीन है।
स्त्री सदैव पुरुष के साथ होती है। साथ होना और अधीन होना इसमे अंतर होता है।
पानी हमेशा दूध में मिल जाता है और समय आने पर पानी स्वयं जल के दूध को बचाता है। इसका अर्थ ये नही की पानी दूध के अधीन है या दूध पानी के अधीन है। दोनों ही साथ है।
"इसी प्रकार स्त्री भी सदैव पुरुष के साथ होती है। स्त्री समर्पण करती है पानी की तरह ओर मन से समर्पित होती है इसका अर्थ ये कभी भी नही है कि स्त्री किसीके अधीन है।"
यह सोच को आज के जमाने मे बदलने की #अत्यंत जरूरत है।
- Dilwali Kudi
#અત્યંત