Hindi Quote in Poem by Girraj Katara

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मैं भूल नहीं पाया हूँ तिरा दुलार मिरी माँ
रोता हूँ आज पाने को तिरा प्यार मिरी माँ ।

कहाँ से अब वह रोटी मिलतीं तेरे हाथ की
यादों में अब तेरे हाथों की मार मिरी माँ ।

अब हमसफर चिलचिलाती धूप का साया यहाँ
और तेरी गोद करती नहीं इंतजार मिरी माँ ।

यहाँ मिरे हर ज़ख्म को कुरेदते हैं लोग तो
किससे करूँ अपने दर्द का इज़हार मिरी माँ ।

तेरा ख़ून हार मानता क्या इस ज़माने से
तूफ़ान से लड़ने को इब्न तैयार मिरी माँ ।

तू रोज मेरे ख्वाब में आ मुझे सुलाया कर
मत करना मिरी फ़रियाद को इंकार मिरी माँ ।

अब तेरे जिगर का टुकड़ा भी टूट जाता है
सह नहीं पाता ये नाजुक दिल प्रहार मिरी माँ ।

छुट्टी के दिन लड़ आऊँ और छिप जाऊँ गोद में
कब आएगा ऐसा कोई इतवार मिरी माँ ।

तिरा जाया 'मन' तो सदा रहा जलता सितम से
पर इसने किया नहीं वक्त से करार मिरी माँ ।

✍️___गिर्राज कटारा

इब्न अर्थात पुत्र

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Hindi Poem by Girraj Katara : 111461802
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