माना की.........प्रभु ।
माना की हमसे बहुत भूलें हुइ हैं
लेकिन हमरी यह भूलों को भी भूलाया जा सकता है।
इस प्रपंच भरे माहोल को भी सुलझाया जा सकता है।।
माना की .......... प्रभु ।
माना की में तुम्हे पा सकूं ,वो मेरी औकात नहीं।
लेकिन तुम मुझे न मिल सको वो तेरी औकात के परे नहीं।।
माना की.........प्रभु।
प्यासे हैं प्रभु तेरे दर्शन को ,माना कि मैं लायक नहीं।
तुम मेरे हो ओर में तुम्हारा हूं ,इससे बड़ी कोई अरज नहीं।।
माना की......... प्रभु।
थम सा गया हूं यह मायावी संसार सागर में
एक तु ही है जो मुझे पार लगा दे।
माना कि हमें तुमसे शीकवा गीला बहोत है
क्या करें , अभी तक तु जो हमें मीला नहीं।।
माना की.........प्रभु।
✍️Aj....