रंगबिरंगी जो पतंग तेरे छत पे आयी है
मैंने चाहत के धागे से दूरिया मिटाई है
तेरे और बहती हवा ने उल्फत जगाई है
मैंने चाहत के धागे से दूरिया मिटाई है
ऐसी भी क्या बेरुखी
जो बात ज़ुबाँ पे है रुकी
कह दे तू या सुन मेरे
नादान दिलकी तिषनगी
तेरे हल्की मुस्कुराहट ने दुनिया भुलाई है
मैंने चाहत के धागे से दूरिया मिटाई है
पतंग तो एक बहाना है
बस तुझसे मिलने आना है
आंख मिलाके तेरी आँखों से
फिर सपनो में उड़ जाना है
छतपे आके देख जरा ऐसी भी क्या रुसवाई है
मैंने चाहत के धागे से दूरिया मिटाई है
देख रंगबिरंगी पतंग तेरे छत पे आयी है
Sagar...✍️
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