कुछ बातें अधूरी हैं, कहना भी ज़रूरी है,
बिछड़ना मजबूरी था, मिलना भी ज़रूरी है।
आज सुन भी जाओ, ये फलसफा जो मजबूरी है,
#दिल तोड़ना फिर सिलना, ये कैसी फितूरी है।
#दिल के बंजर पड़े दीवार में, इश्क की बूंदें पड़ना ज़रूरी है,
धड़कन रुक न जाए कहीं, ये सांसों को समझना भी ज़रूरी है।
#दिल
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