डियर भैया ओर भाइयो...
डेढ महीना हो गया दम घूट रहा होगा ना, जहाँ रात दिन सडको पे घूमते थे, मज़े करते थे ओर कहा सब चुप चाप घर मे केद है ये सोचके के अगर बहार जाएगे, कुछ या किसी को छु लेंगे तो बिमार ना पड जाए कोरोना ना हो जाए, मास्क के अंदर भी घुटन होती होगी सास लेने मे भि तो तकलीफ होती होगी ना? अजीब हालत है लेकिन कुछ कर भी नही सकते!
क्वोरन्टाइन जो है, कभी सोचा लडकियो का तो सारा जिवन क्वोरन्टाइन ही होता है!
केसे?
अंधेरा होने से पेहले घर आ जाना, किसी को छुना मत, अकेले कहि जाना मत
एसे हि तो डरती है वो भी के कही गए किसी से बात कि ओर किसी ने कही छु लिया तो? कोइ छुएगा नही!
जेसे तुम अभि छिकने से भि डर रहे हो,हम चेहरा दिखाने से डरती है
जेसे हि सरकार ने नियम लागए है वेसे हमारे लिए भि अलग हि कानुन है किसी से बात मत करना, जादा जोरसे हसना मत, ढंग के कपडे पेहेनना, अरे एक कपड़े का छोटा सा टुकडा, इनरवेर का स्ट्रेप भी दिख जाए तो एसे देखते है जेसे कोइ अपशुकन कर दिया हो !
अरे अभी देखो मेने इनरवेर लिखा ब्रा नही , हमे शब्द भि सोच-सोच के बोलने पडते है !
पिरियड का पेड कहि गिर भी जाए तो एसे देखगे जेसे बोम्ब गिर गया हो,
बचपन से लडको को भाइ बोलना सिखाया जाता है ताकि सामने वाला बंदा ये ना समज ले के हम अवेलेबल है ओर हमारे दिल मे कोइ फ़िलिंग है लेकिन हमारे खुदका कज़िन भाइ सबको हमारी ही तस्वीर मेरी खास दोस्तो है केहके हि दिखाएगा!
पब्लिक प्लेस पे जाना मना है ना कहि कोइ छु ना ले ओर कोरोना ना हो जाए ,हमे भी एसी ही जिजक होती है के कहि कोइ कमिना छु ना ले बस
आशिर्वाद देने के बदले मे भी पिठ जो फ़िल करनी है हमने कोनसे टाइप कि ब्रा पेहनी है वो जानना उनका हि फ़र्ज़ जो है!
हम धुप कि वजाह से चेहरा नही ढकते जेसे मास्क मे आपका दम घुतटा है वेसे हमारा दम भि मे घुतटा हि है लेकिन कोरोना कि तरह आपकी इन स्केन लगी नज़रो से जो बचना होता है !
वेसे भि BDSM तो आपका भी फ़ेवरेट है इसी का शिकार ना हि जाए इसि लिए हमारे हित के लिए हि तो समाज ने क्वोरन्टाइन किया है हमे !
किसी पे भरोसा तो छोडो हम सोशियल मिडिया अकाउंट भी पब्लिक नहि रखते
पुरी ज़िंदगी क्वोरन्टाइन हि तो होते है लेकिन कोरोना कि नहीं आपकी वजाह से आपकि हि वजह से क्योंकि आपके ठरक कि कोइ हद थोड़ी ना है गन्दे वाले कमेन्ट जो करने है!
थोड़े दिन हि सहि आप भि मज़े लो क्वोरन्टाइन के भाइयो...