उसका चेहरा एक ब्रह्माण्ड है
ब्रह्माण्ड |•⠀
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मैं देखता था चेहरा⠀
उसका ज़ुल्फ़ों के पीछे,⠀
पर मुझे बस⠀
आँखें नज़र आती थी।⠀
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इक रोज़ जब ज़ुल्फ़ों ने⠀
ढंक लिया था पूरा आसमाँ,⠀
और महताब ढल गया था⠀
पूरे कायनात पे;⠀
मैंने ये किया कि,⠀
चुपके से वो ज़ुल्फ़ें⠀
कानों के पीछे सरका दी।⠀
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कायनात के राज़⠀
सच-मुच ख़ूबसूरत हैं।⠀