My Touching Poem...!!!
ए प्रभु बस तूँ ही Esteemed हर दम
कल तक चलते थे सीना तान के हम
कम्बख़्त ये वाइरस क्या आया आज
शान से गिर घूँटनो के बल आ गए हम
आन-बान-शान के नग़मे सारे बेमायने
अना घंमड तकब्बुर सब चकनाचूर हम
आज बेबसियों मजबूरीयों लाचारियों
के हाथ बेवजह ही कतल-ए-आम हम
क़ैदियों से बदतर अपने ही घरों में है तो
जेलों से भी ज़्यादा ही परेशान-से है हम
करने को नहीं काम कोई डरने के नाम
सामान हर कोई 📺 टीवी भी दे पैग़ाम
हर कोई चैनल्स से भी ख़ौफ़ज़दा हैं हम
कितने गए कितने बचे कितने घर लौटे
ओर कितने संक्रमित हूएँ,क्रिकेट-से हम
ए प्रभु क्या मसलेहत है तेरी तूँ ही जानें
पर ना कभी देखीं सुनी इतनी जाने है कम
कर दे करम या रब बस अब तूँ ही तो है
मुश्किलों का तारएाहार जग पालनहार
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#Esteem