My Touching Poem..!!!
पूछें ख़ुद,क्या मैंने मुझको क़तल किया है
मन-भँवर की हसरतों को दफ़्न किया है
बहाने,चलो आज लटार ही मार आते है
चलो सब्ज़ी दूधके नाम ही घूम आते है
घर में दम घूँटता है तो बहार जा आते है
पूछें ख़ुद,क्या मैंने मुझको क़तल किया है
जो ख़ुद नहीं बदलते वक़्त बदल देता है
सौ यारों ये जंग तो खुद से ही लड़ना है
कोरोना से डरो ना बस ख़ुद पर ही क़ाबू
करो ना मनके हर तरंगको कतल करोना
पूछें ख़ुद,क्या मैंने मुझको क़तल किया है
अदना-सा कोरोनाकी हस्ती तो सूक्ष्म है
बाल भी बिगाड़ नहीं सकता ये आपका
गर आप इसकी गिरफ़्तसे ही दूर रहो तो
बस अब तक जंगोंसे अलग जंग लड़ना है
पूछें ख़ुद,क्या मैंने मुझको क़तल किया है
माली-नुक़सानी तो यारों भरपाई होतीं है
पर जानी-नुक़सानी क्या भरपाई होतीं है
सँभालो जान अपनी अपनों के लिए तुम
एक गलती कर सज़ा कितने को देते हो
कब तक बे-मौत मरतें रहोगे,बदल जाओ
पूछें ख़ुद,क्या मैंने मुझको क़तल किया है
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