My New Poem..!!!
ना जाने हम सब कौन-सी गलती
का यारों बिलावजह शिकार हो गए
जितना साफ रखना चाहा हमने दिल
को उतने ही हम गुनहगार हो गए
परवाह सच की करना भी तो अब जुर्म
बना आज के कलियुग के दौर में यारों
जूठे बनने के सारे ही तरीक़े आजकल
हर गाँव हर नगर हर शहर आम हो गए
मतलबी रिश्तों की भीड़ में पक्के रिश्ते
यारों आज सरेआम नीलाम-से हों गए
वृद्ध होना भी गुनाह-सा हो गया आज
जवान बेटों के दिल पराये-से हों गए
बेटियाँ ही बनी है आज बुढ़ापे की लाठी
बेंटोके घरोंके तो राजा ही बदल-से गए
बँटवारा मिलकतो का बना सदमा आज
सही करते ही वृद्धाश्रम के द्वार खुल गए
✍️🥀🌺🌲😭😇😭🌲🌺🥀✍️