खो गया हू मै इस रिश्तो के जंगल मे
ढुंढने पर भी मेरा पता नही मिलता
भटकता हू फरता ता हु मारा मारा
खोजने पर भी मुझे ठिकाना नही मिलता
क्यो सब रिश्ते मतलब के है
बेमतलब का कोई रिश्ता क्यो नही मिलता
इस जंगल मे जो मिला सब अजनबी है
कोई अपना सामान क्यो नही मिलता