नोट बंदी-
थी रात चढ़ानी पर उस दिन, आलम था लगा जुटाने में
आ गयी अचानक एक खबर, मच गया शोर वीराने में
वह वक़्त कहर बन ठहर गया, कानों में घोला जहर गया
खौफ दिखा धनवानों में, आ गया होश मैखानो में
खाने की थाली पड़ी रही, बस न्यूज निगाहें लड़ी रही
घंटे भर की यह बातें थी, बाकी तो पूरी रातें थी
बस नौ बजने ही वाले थे, खुल गए तिजोरी - ताले थे
घर से बाहर- बाहर से घर, घर , बाहर - बाजार हुआ
कर्ज बकाया चुकता करने, हर मानव अब तैयार हुआ
धन राशि जमा करने पहुंचे, एटीएम की लगी कतारों में
दस बजे तलक कोलाहल से, खुल गयी पोल परिवारों में
हजार - पांच सौ के बण्डल, कितने है पीले- लाल गिनों
क्या कहर ढहाया मोदी जी ने, कर दिया बहुत कंगाल गिनों