लुक्की ना दिखाओ
पन्ना की हास्य व्यंग्य कविता
कमरे की थी डिमाण्ड फुल मकान मिल गया ।
सलमान था पसन्द कादरखान मिल गया ।।
वह इश्क़ लड़ता है जिसके दाँत नही हैं ।
बुढ़ावों की भीड़ से कोई जवान मिल गया ।।
वह रोज सताता मुझे कमजोर जान कर।
एक दिन मेरे जैसा ही पहलवान मिल गया ।।
जो अपनी शरारत को ही सम्मान कहता था।
उस दिन उसे भी जोर का सम्मान मिल गया ।।
कब्ज़ा जमा के बैठा है उनके मकान में।
उसको बड़ा लज़ीज़ जो पकवान मिल गया।।
बीबी को कहके दीदी पटा रक्खा है उसने ।
बहुतै बड़ा दबंग ओ मेहमान मिला गया ।।
गरीब को भगवान ने किया था बहुत तंग।
नौटंकी के एक खेल में भगवान मिल गया ।।
पूरा बदन सुजा दिया था कूट कूट कर ।
भगवान को गरीब का वरदान मिल गया ।।
सब वोट का है खेल जो बवाल मचा है ।
अब मीडिया को गोदिया प्रमाण मिल गया ।।
एनआरसी सीएए भी नौटंकी है सारी।
नेता हमारे देश को बेईमान मिल गया ।।
नेता जी कह रहे थे ओ भारत का नही है।
लेकिन उन्हें दमाद मुसलमान मिल गया।।
लुक्की ना दिखाओ कोई जल जाएगा पन्ना।
तुमको अगर मुखिया का क़द्रदान मिल गया ।।
-Panna