न मैं सवाल हूँ ना ही मैं जवाब हूँ,
न ही मैं कोई रहस्य हूँ न ही मैं कोई हल हूँ,
न ही मैं विश्वास हूँ न ही मैं छल हूँ,
न ही मैं प्राप्त हूँ न ही मैं अप्राप्त हूँ,
न ही मैं जाग्रत हूँ न ही मैं सुप्त हूँ,
न ही मैं आंतरिक हूँ न ही मैं बाहरी ही हूँ,
मैं कहीं भी छिपी नहीं हूँ न ही मैं कहीं प्रकट हूँ,
मैं मन से परे हूँ,
बुद्धि से परे हूँ,
वेदों से परे हूँ,
संगीत से परे हूँ,
ध्यान से परे हूँ,
प्रेम से परे हूँ,
बल्कि यह सब तों मुझ तक पहुँचने के माध्यम-मात्र है,
क्योंकि मैं इतनी प्रकट हूँ की अप्रकट सी प्रतीत होती हूँ क्योंकि काल के चक्कर का प्रवाह हूँ मैं,
तुम्हारे हर कर्म की गवाह हूँ मैं,
मैं ही हूँ जो संसार चलाती हूँ, और मैं ही हूँ जो इसे मिटा भी देती हूँ
मैं ही स्वप्न में दिखा मार्ग हूँ,
मैं ही हूँ जो हर घटना-क्रम की छुटी हुई कड़ी हूँ,
मैं ही रुद्राणी हूँ,
मैं ही लक्ष्मी हूँ,
मैं ही सरस्वती हूँ,
और मैं ही कालों के काल #महाकाल की महाकाली हूँ
मैं महाकाली हूँ