यहां क्या जाने कोई आपके जज्बातों को
हर कोई अपने आप में ही तो डूबा है
न फिक्र है किसी को किसी की
लेकिन जज्बात से ही तो जुड़े हैं हम सब
जज़्बात ना हो तो न जाने रिश्ते टूट जाएं कब
न सोच पाएंगे कभी हम बिना जज्बात के
न जाने क्यों लोग नहीं समझ पाते आपके जज्बात को
बिना जज्बात के तो बेरंग सी लगती है यह जिंदगी
फिर भी लोग बस जिए जा रहे हैं
बिना जज्बात के लगती है जिंदगी जैसे पाबंदगी
जिंदगी में हो कोई ऐसा हो जो समझ शके तुम्हारे जज्बात को जिसके साथ हम मिटा सके काली से काली रात को
बस हो कोई ऐसा अपना जो समझे आपके जज्बात को ।
बिंदु अनुराग