जिंदगी की गाड़ी में ,
पीछे छोड़ जाते हैं हम हसीन लम्हे कहीं l
जो कभी हंसते कभी गुनगुनाते यात्री थे हमारे साथ
हवा के झोंकों के साथ ओझल हो जाते हैं वह कहीं l
झांक के जब खिड़की से देखो ,
मिलती है बस धुंधली सी यादें और कुछ नहीं l
गुम हो जाते हैं सब ,
चलती रहती है यह जिंदगी l
जब हमारा वक्त आता है ,
हमें भी उतार गुमशुदा हो जाती है ये जिंदगी ।
I write my heart on paper as the first person I meet.