सुदंर रचना ....
चुनाव ।
देखो आजकल नेताजी कितने शिष्टाचारी हो गये हैं ।
सभी बडों के पांव छुने लग गये हैं ।।
सभी बहनों को माता और बुर्जुगों को पिता मानने लग गये हैं ।
ये समय का फेर नही चुनाव की चाटुकारीता ही हैं ।।
समय आने पर गधे को भी बाप मानने लग गये हैं ।
इनका कोई चरित्र नहीं यह गिरगिट की तरह रंग बदलने लगे हैं ।।
मौकापरस्त है ये अपने स्वार्थ के लिए झुठे वादे देने लग गये हैं ।
इनके ईमान का कोई विश्वास नहीं ये कब बदल जाये ।।
ये तो धडीयाली आंसूं बहाने में माहिर झुठे नाटक दिखाने लग गये हैं ।
इनके झांसे में मत आना ये विश्वास से मतलब निकाल लेगें ।।
पांच साल तक ये खैर मायेगे ,तुम तडपते रह जाओगें ।
ये तो दुर्योधन के साथी अपना उल्लू सीधा करने लग गये है ।।
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