भिखारी की सीख
एक भिखारी ने, एक अमीर व्यक्ति से भीख माँगते हुए कुछ देने का अनुरोध किया। उस अमीर व्यक्ति ने कहा कि तुम तो अच्छे खासे, हट्टे कट्टे नौजवान हो, मेहनत करके धन क्यों नही कमाते ? यह भीख माँगने की आदत का त्याग करो और अपनी मेहनत की कमाई से जीवन यापन करो। वह भिखारी बोला कि वह दिनभर मेहनत मजदूरी करता है परंतु उसे मात्र दो सौ रूपये ही प्राप्त होते है। वह शाम को दो तीन घंटे भीख माँगकर उससे कही ज्यादा रकम प्राप्त कर लेता है इसलिये उसने भीख माँगना अपना व्यवसाय बना लिया है।
आप बुरा ना माने तो एक बात कहूँ, अमीर व्यक्ति बोला हाँ कहो। भिखारी ने कहा कि आप भी प्रतिदिन सुबह प्रभु से प्रार्थना करते समय मन ही मन यह माँगते है कि आज का दिन अच्छा व्यतीत हो और कामकाज में अच्छी कमाई हो। यदि इसे गंभीरता से सोचे तो आप दोनो हाथ जोडकर भगवान से भीख ही माँग रहे होते है। मैं दोनो हाथ फैलाकर भगवान के नाम पर आपको निमित्त मानते हुए धन प्राप्ति की आशा करता हूँ, आप कुछ दे देंगें तो प्रभु से आपकी खुशी की दुआ माँगते हुए चला जाऊँगा।
उस अमीर व्यक्ति ने सोचा कि इसे भीख में कुछ ज्यादा धन दे दिया जाए तो यह खुश होकर मेरे लिए ज्यादा दुआ माँगेगा। यह सोचकर उन्होने उसे पाँच सौ रूपये दे दिये। वह भिखारी मुस्कुराता हुआ यह कहकर कि काश आपने बिना किसी लालच के भिक्षा दी होती तो दुआएँ आपके लिए बहुत प्रभावी होती। किसी आशा एवं अपेक्षा में दिए गए किसी भी प्रकार के दान से पुण्य प्राप्ति की अपेक्षा नही रखनी चाहिए। यह कहता हुआ वह आगे बढ़ गया।