शायरी नहीं तुम पूरी गज़ल हो,
किचड़ में खिली एक कमल हो !
लफ़्ज़ों पर बैठी एक नज़्म हो...
जिंदगी में प्यार की "लहर" हो।
कड़ी धूप में तुम घना छाव हो
तुम ही गज़ल में सावन की घटा हो।
तेरी ही जुल्फ़ों से होती हैं धूप-छाव
जीवन संगीत में तुम ही सरगम हो।
झरने की तुम कल कल आवाज हो
तुम ही लहरों की वो सुरीली तान हो।
वो पत्तों की सर सराहट हो....
तुम्हीं मेरी गज़ल, तुम्हीं मेरी शायरी हो।Pagal...