तुम होते हो तो मुझे गम, गम नहीं लगता,
भले ही थोड़ा हो कुछ भी, कम नहीं लगता।
तुम्हारे ज़ुल्म को हंस कर के सह लेता हूँ मैं,
तुम्हारा दर्द अब मुझको सितम नहीं लगता।
हज़ार आंसू हो पलकों की ओट में बैठे,
मगर आंखों का कोना कोई नम नहीं लगता।
तुझे ही सोचता रहता हूँ हर घड़ी यूं ही,
मुझे तेरा ये वहम, वहम नहीं लगता।
तुम्हारे चेहरे को मैं क्या कहूँ मेरे दिलबर,
किसी गुलाब से बिल्कुल भी कम नहीं लगता।
- सिराज अंसारी