बाबासाहब आंबेडकर
बचपन में जिसने संघर्ष किया ,
छुआछूत खुद ही महसूस किया
जाटपाट के जहर में जिया ,
पानी का घूंट भी अलग से पिया
ज्ञानी कायदा शास्त्री था और अनुभवी अर्थशास्त्री था
ज्ञान जिसका जेवर था और आक्रामक उसका तेवर था
जल पर सबका समान अधिकार ,
ख़तम किया जिसने एकाधिकार ,
कालाराम मंदिर का वो सत्याग्रह ,
जिसने तोडा धर्म का गलत पूर्वाग्रह
वो जन्मा वंचितों के हक़ के लिए था ,
लडा पीड़ितों के न्याय के लिए था,
परिवर्तन ही उसका संकल्प था ,
और न कोई उसके पास विकल्प था
ऐसा नायक जिसकी आवाज़ बना मूकनायक
समता दिलाने वाला जनता का जननायक
कांग्रेस को भी जिसने आइना दिखाया था ,
हरिजन केहने पर गाँधी को भी खूब सुनाया था,
आडम्बर के खिलाफ लड़ाई हे ये बताया था ,
जिसने अन्तमे बुद्ध को अपनाया था
बुद्ध कबीर और ज्योतिबा की उपासना की
ज्ञान स्वाभिमान और शील की साधना की
भारत के सुनहरे भविष्य के लिए विधान लिखा
ये वही हे , जिसने अपने दम पे पूरा संविधान लिखा
इस देश में अब दो अवतार होने चाहिए
एक भीम तो दूसरा सरदार होना चाहिए
जय भीम , जय सरदार
कविता के रचनाकार:
वेद चन्द्रकांतभाई पटेल
२४,गोकुल सोसाइटी ,
कड़ी ,गुजरात Mob.-9723989893