इबादत के नाम पर कुछ भी करते हो
बेवजह ख़ुदा को तंग करते हो।
कभी जानी नहीं मासूमियत क्या है
पूरा दिन बच्चों को परेशान करते हो।
मेरा आंगन छीनने की कोशिश में
तुम्हारी परछाईं क्योँ छोटी करते हो।
तूमने अलविदा कहा और मैं खो गया
तुम क्या अपनों से भी सख़्ती करते हो।
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सुभाष देसाई