हिंदी
कल हिंदी दिवस था। आजकल सिर्फ तरह तरह के दिवस माना कर लोग अपने कर्तव्यों की इतिश्री समझ लेते हैं। कभी फादर्स डे तो कभी मदर्स डे मना लेते हैं और समझते हैं कि बिना कुछ किए हुए मात्र उतने से ही पितृ अथवा मातृ ऋण से उऋण हो गए। उसी प्रकार केवल हिंदी दिवस पर हिंदी को याद कर लेना प्रयाप्त नहीं है।
आज भारत के सभी जन को सोचना चाहिए कि अपनी मातृभाषा का सम्मान किस तरह बढ़ाएं और किस तरह अंग्रेजी से ऊपर उसका स्थान बनाएं। हिंदी बोलना तो एक आत्म सम्मान की बात है।
मां बाप को अपने बच्चों द्वारा हिंदी बोलने पर गर्व करना चाहिए लेकिन वह केवल अंग्रेजी बोलने पर गर्व करते हैं। मेरा मानना है कि बच्चे अपनी मातृभाषा में ज्यादा सीख सकते हैं और अपना अच्छा केरियर बना सकते हैं।
मैंने "मातृभरती. कॉम" द्वारा प्रकाशित अपनी एक कहानी "आपका बच्चा कमाल का है" में उल्लेख किया था कि कैसे एक बच्चा हिंदी और संस्कृत के श्लोक पढ़कर पूरे स्कूल में सराहा गया था और फलस्वरूप उसकी पूरी जिंदगी ही बदल गई थी।
आर0 के0 लाल