शब्द के शब्द कोश से
खोज कर रखे है शब्द
अक्षरों के मेल से
गढ़ गए पन्नो में शब्द
पर, शब्द है निशब्द
ईश की आराधना में
दिल से निकल पढ़ते है शब्द
क्रोध के आवेग मे भी
मुँह से निकलते है अपशब्द
ठेस लगती किसी को
कारण बनते है शब्द
सम्मान की परिभाषा में भी तो
स्तेमाल होते है शब्द
इस जहां के अच्छे बुरे की
दस्ता बताते हे शब्द
इंसान की जुवा पर क्यो
हो जाते है ये अपशब्द
शब्द की शब्दावली में
क्यों मौन रहते है शब्द
तहज़ीब की अहमियत समझ कर
क्यों नहीं बोलते है शब्द
अपनों की मौजूदगी में
क्यों खो रहे है शब्द
हिन्द की हिंदावली में
मौजूदगी ढूंढ़ते है शब्द
"काल्पनिक" की
कल्पनाओ की भावनाओ में
खो रहे है शब्द
शब्द के शब्द कोश से
खोज कर रखे है "शब्द"
----------------------------
दीपक बुंदेला