पता नहीं क्यों तेरी हर गलती को माफ़ कर देती हूं,
नाराज तुझसे हुं, खुद से हुं या खुदा से हुं,
किस्मत को दोष देकर खुद को संभाल लेती हूं ।
नहीं मांगना है तुझे अब दुआओं में,
फिर भी खुदा से तेरा ज़िक्र कर लेती हूं।
कह तो दिया तुझसे अब बात नहीं करनी,
फिर भी तुझको याद कर ही लेती हूं।
मेरे दिल के दरवाजे बंद कर के,
चाबी कहीं फेंक आई हूं,
फिर भी एक दरार सी है जहां से झांक लेती हूं ।
- जिज्ञासा राठोड