My New Poem....!!!!
जब दिल ज़ख़्मी होता है
किसी अपने के धोखे से
फिर धार धार झार झार
दिल बस रोता है बार बार
बिना ऑसू बिना आवाझ़ फिर
ना दीनको चैन ना रातको सूकूँ
ऑंखें बिन ऑसु बहती लगातार
रश्क-ए-दर्द में दिल ग़म-ख़्वार
नग़मे भी लगने लगे हैं शमशीर
लफ़्ज़ नग़मों के बने जैसे नासूर
ज़ख़्मी चाक जिगर है तार तार
इश्क़नुमा सैलाब कश्ती मँझधार
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