आ श मा न
वकीलों की वकालत नहीं चलती
जब कोई फैसला आसमा से उतरता है।
डॉक्टरों की दवाई नहीं चलती
जब किसी का बुलावा आसमा से आता है।
डाकिया की डाक कब पहुंचे
जब किसी की बात दिल से दिल तक पहुंचे।
पुलिस की सजा नहीं चलती
जब कोई सजा अास्मा से उतरती है।
अदालत का न्याय काम नहीं करता।
तब कोई न्याय आश्मा से आता है।
न्यायाधीश की अदालत नहीं पहुंचती।
तब कुदरत की अदालत आस्मा में होती है।