My New Poem ..!!!
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घुटनोंके बल रेंगते-रेंगते
कब पैरों पर में खड़ी हुई
तेरी ममताकी प्यारी छाँवमें
जाने कैसे कब में बड़ी हुई
पता ही नहीं चला..!
मालिस लाल तेलकी रगड़ाई
बाद नेहलानेके काजल ऑखौमें
पावडर काला टीका दूध मलाई
आज भी सब कुछ है वैसा ही यादों
का यह जज़ीरा सज़ा जहनमें कैसे
पता ही नहीं चला..!
सीधी-साधी,भोली-भाली मैं ही
सबसे अच्छी हूँ तेरी सबसे प्यारी
गुड़िया मैं ही मैं हूँ हर वकत नजरमें
तेरी घडकनमें तेरी माँ प्यार ये तेरा
कैसा है मेरे लिये कैसे में भुल जाऊँ
कितनी भी हो जाऊ बड़ी में माँ माँ
माँ मैं आज भी तेरी बच्ची ही हूँ..!!
ये प्यार फिरसे कैसे अब में लुटाने चली
पता ही नहीं चला..!
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