My New Poem....!!!!
ता-उम्र , तुम पर कर्ज रहेगा...
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वो इश्क़ जो तुमने पा कर
मुझसे, कभी लौटाया ही नहीं 🌹
वह लम्हे जो कभी साथ बिताए थे,
हम-कदम बन साथ दो कदम चले थे
बीती बर्खा के ख़ुशनुमा बारिशों में
साथ ऑचल निचोड़ कर मरोड़े थे,
भूलीं यादों की वह हसीन सौग़ातों की
ढलतीं शाम-सी वह मँझर-कसी लौटा दो
हमें अपना पहला सुनहरा ख़्वाब लौटा दो
राहों में साथ जो गुज़ारें वह लम्हात लौटा दो
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