मेरी कविताओं पर,
तेरी अनकही सलामी काफी है
तेरे दिल पर मेरी अमिट, निशानी काफी है
काफी है,यह दिलचस्प सिलसिला खामोशी का
तू मेरे शब्दों को पढ़कर हंस देती है,
तेरी इतनी मेहरबानी काफी है
काफी है,तेरी बंदिशों का टूट कर संभालना
लगता है मेरी कशिश में,
अभी तेरी कहानी बाकी है।