।। श्री ।। आज का विषय हे ‘ दर्द ‘
दर्द नाम का सब्द कानोमे पड़ते ही न जाने क्या होजाता हे की पुरा शरीर कमज़ोर पड़ने लगता। हे चेहरा पुरी तरह से ढीला होजाता हे शरीर का कोई भी हिस्सा अच्छे से काम नहीं करता आँखोंमे एक दर्द की चूभन ओर नमी सी होने लगती हे एसे लगता हे की हमारा शरीर हमारी ही वस मे नहीं हें.
अभी के लिए इस विषय को मे विश्तार से नहीं लिखूँगा ! दर्द ये कहने मे दो सब्द का हे मगर ये जिसे मिलता हे ना वही जनता हे की हक़ीक़त मे दर्द हे क्या । कहने मे तो सब लोग कहते हे की आप का दर्द हम समज ते हे, बिचारे को बहोत दर्द हो रहा हे, हमें भी आपकी तकलीफ़ से दर्द होता हे . तो ये सारी बातें झूठ हे ! किसी को कोई फ़र्क़ नहीं पडता की कोई तकलीफ़ मे हो या दर्द मे सिर्फ़ झूठा दर्द ओर जूठे अफ़सोस जताते हे लोग
अगर दर्द समज हो तो पहले ख़ुद पर दर्द लेके डेखो कहिकत सामने आजाएगी की असल मेन दर्द होता क्या हे. अगर सबको एक दूसरे का दर्द होने लगे तो कोई डाक्टर किसी का ओपरेशन नहीं करेगा किसीके टाँके नहीं लेगा किसिको मलम-पट्टी नहीं करे गा अगर करे गा तो उसे भी दर्द होगा ओपरेशन करते समय टाँके लेते समय, मगर डाक्टर तो दर्द नहीं होता इसी लिए वह सब मरीझो जा इलाज करता हे।
सभिको एक दूसरे का दर्द होने लग जाए तो समजो चलपड़ि अपनी दुनिया.
अगर कोई दर्द मे हे तकलीफ़ मेन हे तो उसका बनसके उतनी मदद करे साथ दे किसिका मझाक न बनाए. क्यूँ की समय कही नहीं जाता वह सबको कुछ ना कुछ तो ज़रूर दिखाता हे. चाहे अच्छा हो या बुरा दुःख हो या चाहे सुख ।।।