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[? *यदि विश्वास और आस्था है*
*तो*
*बन्द द्वार में भी रास्ता है...!!!* ?
*जब कोई “हाथ” और “साथ”*
*दोनों ही छोड़ देता है,*
*तब “कुदरत” कोई न कोई*
*उंगली पकड़ने वाला भेज देता है,*
*इसी का नाम “जिदंगी” है...!!*
*मुस्कुरा कर चलते रहिए..!!*
जय सियाराम जी