एक दिन सबको मौत हैँ आनी
कियोंकि मौत हुँ मैं मनमानी
ना तो कोई रूप रंग हैँ मेरा ना हीं कोई आकार
ना तो कोई अंग हैँ मेरा ना ही कोई घरबार
फिर भी मैं हुँ सबकी जानी पहचानी
मैं हुँ मौत मौत हुँ मैं मनमानी
धर्म हैँ मेरा कर्म हैँ मेरा सबको देना हानि
तुम को भी एक दिन निश्चित मौत हैँ आनी
मुझमे नहीं दया कोई
निर्दयीता मैंने अक्सर ढोंई
समय पर सदैव आता क्षण भर की कीमत मैंने जानी
सृष्टी के हर जीवन को है एक दिन मौत आनी
ना रख मुझ से तूँ कोई आशा
मिलेगी तुझको हर बार निराशा
समय से पहले मैं नहीं आता
तय समय को मैं नहीं गवाता
मत कर तूँ रूद्र विलाप व्यर्थ हैँ तेरी आँखों का पानी
मैं हुँ मौत मौत हुँ मैं तुझको भी आनी
चाहे हो तेरा व्यस्त व्यापार
चाहे तूँ त्यागे जग संसार
चाहे तूँ जीवन को दे दुत्कार
चाहे हो तुझको लाख परेशानी
ना बचा कोई मुझसे एक दिन सबको मौत हैँ आनी
सबके कष्टों का अंत हुँ मैं सर्व परम आनंद हुँ मैं
जीवित रहकर ये बात किसी ने ना जानी
मैं हुँ मौत मौत हुँ मैं मनमानी
मैं बड़े को आता बच्चे को आता
मैं झूठे को आता सच्चे को भी आता
बार बार बतलाये तुमको महाज्ञानी
फिर भी मेरे आने से क्यों होती हैरानी
मैं हुँ मौत मौत हुँ मैं मनमानी
जीवन चक्र का आधार हुँ मैं
कुछ की जीविका का व्यापार हुँ मैं
मैं हुँ लोगो की समस्या पुरानी
मैं हुँ मौत मौत हुँ मैं मनमानी