सुदंर कविता ..
निगाहों निगाहों में हमें बुलाते रहें ।
दिल की बात हमसे सदा छुपाते रहें ।।
प्रेम में मीठी आहें सदा भरते रहें ।
हमारे सामने आने से सदा डरते रहें ।।
प्यार के गीत सदा गुनगुनाते रहें ।
प्रेम का इजहार करना छुपाते रहें ।।
अपने ख्वाबो में हमें सदा सजाते रहें ।
दिल की बाथ होठो पे लाने से डरते रहें ।।
कसमें वफा की सदा हमारे लिए खाते रहें ।
वफादारी निभाने से हमेशा कतराते रहें ।।
सूरत चांद जैसी हमें सदा दिखलाते रहें ।
अंखियों में हमारी सूरत बसाने से डरते रहें ।।
प्यार तो दिल ही दिल सदा करते रहें ।
हमारे दर पे आने से सदा मुकरते रहें ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,अमदाबाद ,गुजरात ।